Factgiri Fact Check: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया है। यह विवाद 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। लेकिन उपलब्ध अदालती कार्यवाही और चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार द्वारा व्यक्तिगत रूप से अवैध बदलाव किए जाने का निष्कर्ष नहीं दिया है।
क्या है वायरल दावा?
राहुल गांधी ने 5 अक्टूबर को X पर दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया। उन्होंने इसे चुनाव आयोग के पद के दुरुपयोग से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति भी चर्चा में आई, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा का उल्लेख था।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
OnlyFact की 6 अक्टूबर की फैक्ट-चेक रिपोर्ट के अनुसार, विवाद में दो अलग दस्तावेजों के बीच अंतर समझना जरूरी है। पहला, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला निर्धारित फॉर्म-6। दूसरा, SIR प्रक्रिया के दौरान उससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र। रिपोर्ट में 2018 और 2026 के फॉर्म-6 की तुलना की गई। दोनों में आवेदक से मांगी जाने वाली मुख्य जानकारियां काफी हद तक समान पाई गईं। हालांकि, SIR के लिए अलग घोषणा पत्र जोड़ा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अक्टूबर की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी। लेकिन अदालत ने यह फैसला नहीं दिया कि ज्ञानेश कुमार ने व्यक्तिगत रूप से फॉर्म बदला या बदलाव गैरकानूनी था। अदालत ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग का रिकॉर्ड सामने आने पर यह देखा जाएगा कि किसने क्या बदलाव किया।

चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति में क्या था?
26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति में आयोग ने कहा था कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। OnlyFact के विश्लेषण के अनुसार, यह उल्लेख फॉर्म-6 के मूल प्रारूप में बदलाव की मंजूरी से अलग था। 27 मई के न्यायिक फैसले में अदालत ने SIR के लिए उपयुक्त दस्तावेजी प्रक्रिया तैयार करने के आयोग के सीमित अधिकार को स्वीकार किया था।

FactGiri का निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं देने की बात स्पष्ट की थी। यह तथ्य सही है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने व्यक्तिगत रूप से गैरकानूनी या एकतरफा बदलाव किया। इस संबंध में अदालत का अंतिम निष्कर्ष सामने आए बिना आरोपों को सिद्ध तथ्य बताना भ्रामक है।
FACTGIRI VERDICT: भ्रामक दावा




