Factgiri Fact Check: उत्तर प्रदेश के हरदोई में पुलिस विभाग से सीसीटीवी कैमरे लगाने के नाम पर 52 लाख रुपये से अधिक की ठगी का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दावा है कि पुलिस ने मुंबई की एक फर्म को पूरा भुगतान कर दिया, लेकिन छह महीने बाद भी कैमरे नहीं पहुंचे। हालांकि, FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि हरदोई पुलिस के अनुसार कुछ उपकरणों की आपूर्ति हुई थी और उन्हें थानों पर लगाया भी गया था। वहीं, बाकी उपकरण नहीं मिलने पर फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर राहुल सैनी नाम के यूजर की पोस्ट में दावा किया गया कि हरदोई पुलिस ने थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए मुंबई की एक फर्म को 52,51,672 रुपये दिए थे। पोस्ट के मुताबिक, भुगतान के छह महीने बाद भी कैमरे नहीं पहुंचे और पुलिस को खुद अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
FactGiri ने इस मामले में हरदोई पुलिस के उपलब्ध स्पष्टीकरण और हिंदुस्तान टाइम्स, अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान तथा टीवी9 हिंदी की रिपोर्टों का मिलान किया। पुलिस के स्पष्टीकरण के मुताबिक, जिले के थानों में सीसीटीवी कैमरे और संबंधित उपकरण लगाने के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से मुंबई की फर्म LIGHT FORCE BUILDIMT LTD को ठेका दिया गया था।
फर्म को करीब 52.51 लाख रुपये का ऑनलाइन भुगतान हुआ। पुलिस का कहना है कि कुछ उपकरणों की आपूर्ति हुई और उन्हें थानों पर स्थापित भी किया गया। हालांकि, शेष उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।
16 अक्टूबर को क्यों दर्ज हुई FIR?
हरदोई पुलिस के अनुसार, अधूरे उपकरणों की आपूर्ति को लेकर फर्म के संचालक अमित राय से संपर्क किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद प्रतिसार निरीक्षक यशवंत प्रताप सिंह की तहरीर पर 16 अक्टूबर 2026 को कोतवाली शहर में मुकदमा दर्ज कराया गया। अमर उजाला की रिपोर्ट में विशेष रूप से डीवीआर उपलब्ध नहीं कराए जाने का उल्लेख है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हरदोई पुलिस के आधिकारिक बयान में भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल यूपी पुलिस हरदोई के साथ ठगी/फ्राड संबंधित खबरें असत्य और निराधार है।
FactGiri का निष्कर्ष
हरदोई पुलिस द्वारा 52.51 लाख रुपये का भुगतान किए जाने और उपकरणों की आपूर्ति को लेकर मुकदमा दर्ज कराने की बात सही है। पुलिस के स्पष्टीकरण के अनुसार कुछ उपकरण पहले ही लगाए जा चुके हैं। बिना आपूर्ति का पूरा हिसाब सामने आए यह कहना कि पुलिस को एक भी उपकरण नहीं मिला या पूरी रकम की ठगी भ्रामक है।
FACTGIRI VERDICT: सोशल मीडिया पर वायरल यूपी पुलिस हरदोई के साथ ठगी/फ्राड संबंधित खबरें असत्य और निराधार है। भ्रामक




