क्या आजमगढ़ हत्याकांड ‘ठाकुर बनाम ब्राह्मण’ विवाद है? वायरल दावे की FactGiri पड़ताल

Factgiri Fact Check: आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या के बाद बच्चों को बंधक बनाने वाले अरविंद सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। सोशल मीडिया पर इसे ‘ठाकुर बनाम ब्राह्मण’ विवाद और आरोपी को जातिगत संरक्षण मिलने से जोड़कर पोस्ट किया जा रहा है। FactGiri की पड़ताल में इन दावों की पुष्टि नहीं होती। उपलब्ध पुलिस बयानों और रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत घर में चल रही पूजा और पंडितों से आधार कार्ड मांगने को लेकर हुई थी।

सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा है?

एक्स और फेसबुक पर वायरल पोस्ट्स में घटना को जातिगत संघर्ष बताया जा रहा है। कुछ पोस्ट में दावा है कि आरोपी मुख्यमंत्री की स्वजाति का होने के कारण पुलिस उसे बचा रही थी। इन दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

पुलिस के मुताबिक क्या हुआ?

अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम अरविंद सिंह घर पहुंचा, जहां पूजा चल रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने पूजा करा रहे पंडितों से आधार कार्ड मांगा। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और फायरिंग में उसकी पत्नी बबीता सिंह तथा पुरोहित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई।

इसके बाद अरविंद अपने तीन बच्चों के साथ घर के अंदर एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने कई घंटे तक उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समझाने का प्रयास किया। वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान आरोपी ने अपने बेटे को गोली मार दी और बाद में पुलिस टीम पर भी फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ और उसकी मौत हो गई।

घायल आठ वर्षीय बेटे शौर्य की भी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। दो अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस तरह घटना में आरोपी समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई।

क्या यह जातिगत रंजिश थी?

अब तक सामने आए पुलिस और प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में इसे किसी ‘ठाकुर बनाम ब्राह्मण’ जातिगत संघर्ष के तौर पर स्थापित नहीं किया गया है। घटना का तत्काल कारण पूजा के दौरान हुआ विवाद बताया गया है। परिवार से जुड़ी पुरानी घटनाओं और पूजा कराने के कारणों की भी जांच और रिपोर्टिंग सामने आई है, लेकिन इसे जातिगत हत्या साबित करने वाला कोई आधिकारिक तथ्य उपलब्ध नहीं है।

FactGiri की पड़ताल में ‘जाति के कारण आरोपी को पुलिस बचा रही थी’ वाला दावा भ्रामक निकला। असल में पुलिस ने कई घंटे तक बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऑपरेशन चलाया और आरोपी की पुलिस कार्रवाई में मौत हुई।

इस घटनाक्रम की रिपोर्टिंग दैनिक भास्कर NDTV, Aaj Tak, Amar Ujala, Dainik Jagran और TV9 Bharatvarsh समेत कई प्रमुख समाचार संस्थानों ने की है।

निष्कर्ष

फैक्ट चेक: दावा भ्रामक है, उपलब्ध आधिकारिक पुलिस बयानों और विश्वसनीय रिपोर्टों में जातिगत रंजिश या जाति के आधार पर आरोपी को संरक्षण देने की पुष्टि नहीं होती।

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