FactGiri Fact Check: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से 85 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाताओं के नाम अपने आप हटाए जाने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रज्ञा गुप्ता नाम के एक एक्स अकाउंट से दावा किया गया कि प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने खुद इस बात को स्वीकार किया है। हालांकि, FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ऐसी किसी स्वीकारोक्ति से इनकार किया है। उन्होंने वायरल दावे को फर्जी बताते हुए धार्मिक आधार पर भ्रम फैलाने की आशंका जताई है।
क्या है वायरल दावा?
X पर @GuptaPragnya नाम के अकाउंट से दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने 85 हजार से अधिक फॉर्म स्वतः हटा दिए और इनमें मुख्य रूप से मुस्लिम मतदाता शामिल थे। पोस्ट में इसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कबूलनामा बताया गया।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
FactGiri ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक एक्स अकाउंट और मामले से जुड़ी एबीपी न्यूज तथा द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की रिपोर्टों की पड़ताल की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने वायरल पोस्ट का खंडन करते हुए कहा कि नवदीप रिणवा ने कभी ऐसी स्वीकारोक्ति नहीं की। कार्यालय ने पोस्ट को फर्जी खबर बताया।
दरअसल, विवाद की शुरुआत 9 अक्टूबर को प्रकाशित द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की जांच रिपोर्ट से हुई थी। इसमें दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान ERONET सॉफ्टवेयर से 85,854 फॉर्म-7 स्वतः तैयार हुए, जिनमें नाम हटाने का कारण दर्ज नहीं था।

85,854 फॉर्म पर चुनाव अधिकारी ने क्या कहा?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित प्रविष्टियां मतदाताओं की जांच, नोटिस, सुनवाई और आदेश के बाद तैयार हुई थीं। अधिकारी के अनुसार, यह प्रक्रिया बिना जांच के मतदाताओं के नाम अपने आप हटाने जैसी नहीं थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लगभग 4,700 नामों से जुड़ी सामूहिक आपत्तियों का आंकड़ा दिया था। लेकिन यह आंकड़ा 85,854 फॉर्म के सभी या अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित होने का प्रमाण नहीं है।

FactGiri का निष्कर्ष
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा 85 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाताओं के नाम स्वतः हटाए जाने की बात स्वीकार करने का दावा गलत है। अधिकारी ने ऐसी स्वीकारोक्ति से स्पष्ट इनकार किया है। UP CEO ने कभी नहीं कहा कि 85,000+ फॉर्म मुख्य रूप से मुस्लिम मतदाताओं के ऑटो-डिलीट हुए।
CEO ने खुद इस पोस्ट को FAKE NEWS करार दिया है और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाला बताया है।
FACTGIRI VERDICT: FAKE/ भ्रामक



