योगी सरकार में दिनदहाड़े मारपीट और पुलिस चुप? FactGiri की पड़ताल में वाराणसी के वायरल वीडियो का सच आया सामने

FactGiri Fact Check: वाराणसी में सड़क पर युवक-युवती से लाठी-डंडों से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो रहा है। वीडियो शेयर करते हुए योगी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में दिनदहाड़े अत्याचार हो रहा है। हालांकि, FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि वीडियो अक्टूबर के पहले सप्ताह का है और पुलिस ने घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

क्या है वायरल दावा?

17 अक्टूबर के आसपास एक्स अकाउंट @RamnareshY21480 से एक वीडियो साझा किया गया। इसके साथ लिखा गया, “योगी जी के राज में यही राम राज है, दिन दहाड़े अत्याचार हो रहा है!! वीडियो में दो युवक सड़क पर दोपहिया वाहन से जा रहे युवक-युवती पर डंडों से हमला करते दिखाई देते हैं।

FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?

FactGiri ने वायरल वीडियो की पड़ताल के लिए अमर उजाला और स्थानीय समाचार पोर्टल भदैनी मिरर की रिपोर्टों की जांच की। अमर उजाला ने 2 अक्टूबर 2026 की रात इस घटना का वीडियो प्रकाशित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, मामला भेलूपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाकुंड स्थित बनकटी हनुमान मंदिर के पास का है। इससे स्पष्ट है कि वीडियो 17 अक्टूबर की नई घटना का नहीं है।

24 घंटे के भीतर दो आरोपी गिरफ्तार

लोकल न्यूज पोर्टल भदैनी मिरर ने 3 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया कि पद्मश्री चौराहे के पास हुई मारपीट के मामले में भेलूपुर पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दुर्गाकुंड निवासी करन भारती (19 वर्ष) और ऋषभ भारती (18 वर्ष) के रूप में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, दुर्गाकुंड चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक संदीप कुमार सिंह ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच शुरू की थी।

शिकायत नहीं मिलने पर भी पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, घटना में शामिल पीड़ित युवक-युवती की तलाश की गई, लेकिन उस समय उनका पता नहीं चल सका था। पुलिस को पीड़ित पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत भी नहीं मिली थी। वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर सार्वजनिक स्थान पर मारपीट और उपद्रव के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

FactGiri का निष्कर्ष

वाराणसी में युवक-युवती पर लाठी-डंडों से हमला होने की घटना वास्तविक है। लेकिन वीडियो को अक्टूबर के मध्य की नई घटना के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक है। घटना का वीडियो 2 अक्टूबर को ही प्रकाशित हो चुका था और 3 अक्टूबर तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आ गई थी।

FACTGIRI VERDICT: वीडियो असली, लेकिन पुरानी घटना को नई बताने का संदर्भ भ्रामक; दो आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि।

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