Factgiri Fact Check: हंडिया में समाजवादी पार्टी के जिला सचिव और पूर्व प्रधान पवन यादव की हत्या के बाद इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। वारदात के बाद सपा की ओर से इसे प्रदेश में PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज पर हमले से जोड़ते हुए योगी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए। लेकिन Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि, हत्या की जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और शुरुआती पूछताछ में मामला व्यक्तिगत रंजिश से जुड़ा निकला, न कि किसी जाति विशेष का।
क्या था ‘PDA पर हमला’ वाला दावा?
15 सितंबर को हंडिया क्षेत्र में पवन यादव की गोली मारकर हत्या के बाद सपा प्रवक्ता दान बहादुर सिंह मधुर ने घटना को प्रदेश में PDA समाज के लोगों की हत्या से जोड़ते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावे पर सवाल खड़े करती हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी हत्या को राजनीतिक और जातीय हमले के तौर पर पेश किया जाने लगा।

पुलिस जांच में क्या सामने आया?
जांच आगे बढ़ने के बाद प्रयागराज पुलिस ने लल्ला यादव, बृजेश यादव और निहाल अली को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक तीनों एक ही बाइक से वारदात वाली जगह पहुंचे थे। निहाल बाइक चला रहा था, बृजेश बीच में और लल्ला सबसे पीछे बैठा था। पुलिस का कहना है कि लल्ला यादव ने पवन यादव पर गोली चलाई। वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे भी बरामद किए गए हैं।
कुछ रिपोर्टों में गांव की पुरानी चुनावी और स्थानीय रंजिश की भी चर्चा है। ABP Live की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने मौजूदा प्रधान पति विनोद यादव और लल्ला यादव से भी पूछताछ की थी और मामले को प्रधानी चुनाव की रंजिश से जोड़कर देखा जा रहा था। वहीं UP Tak ने परिवार की ओर से पुराने विवाद और 2018 की घटना से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया है। हालांकि, इन पहलुओं पर पुलिस की जांच को अंतिम तथ्य मानने से पहले आगे की कार्रवाई का इंतजार जरूरी है।

घटना कैसे हुई थी?
15 सितंबर की शाम हंडिया थाना क्षेत्र में बाइक सवार तीन हमलावरों ने पवन यादव को गोली मार दी थी। वह मुंगराव गांव के पूर्व प्रधान और सपा के जिला सचिव थे। गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर जांच आगे बढ़ाई।
फैक्ट चेक में क्या निकला?
यह कहना सही है कि पवन यादव की हत्या हुई और सपा ने इसे PDA समाज पर हमले के व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ा। लेकिन पुलिस की अब तक सामने आई जांच में हत्या की वजह व्यक्तिगत रंजिश बताई गई है और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसलिए “पवन यादव की हत्या PDA समाज पर सुनियोजित हमला है” वाले दावे को मौजूदा पुलिस जांच के आधार पर स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
FACT GIRI Verdict: दावा भ्रामक
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या के पीछे व्यक्तिगत रंजिश की बात बताई है। इसलिए घटना को केवल PDA समुदाय पर हमले के रूप में पेश करना भ्रामक है।




