Fact Check: फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में गर्भवती महिला की प्रसव के बाद मौत का मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पति को पूछताछ के लिए ले जाने पहुंची पुलिस का विरोध करने पर महिला के साथ मारपीट की गई और उसके पेट में लात मारी गई। पोस्ट में इसे पुलिस की बर्बरता बताते हुए सरकार पर भी निशाना साधा गया।
लेकिन Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि पुलिस पर मारपीट का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। फिरोजाबाद पुलिस ने आरोप से साफ इनकार किया है और सबसे अहम बात यह है कि पुलिस के मुताबिक महिला के पोस्टमार्टम में कोई External Injury यानी बाहरी चोट नहीं मिली।
क्या है कांग्रेस का दावा?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस का वायरल पोस्ट में आरोप लगाया गया कि 13 सितंबर की रात शिकोहाबाद के लभऊआ गांव में पुलिस चोरी के मामले में गौरव नाम के युवक को लेने पहुंची थी। उसकी गर्भवती पत्नी अंजली ने पति को ले जाने का विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने उसके साथ धक्का-मुक्की की और पेट में लात मारी।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद अंजली की तबीयत बिगड़ी। अगले दिन उसने बेटे को जन्म दिया, लेकिन हालत गंभीर होने पर फिरोजाबाद के निजी अस्पताल ले जाने के बाद उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने छह कर्मियों को निलंबित किया।
Factgiri की पड़ताल में पुलिस का क्या पक्ष सामने आया?
इस मामले में फिरोजाबाद पुलिस के आधिकारिक जवाब को भी देखा गया। पुलिस का कहना है कि गौरव को चोरी के मामले में पूछताछ के लिए थाने लाया गया था और उसे बाद में परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। वहीं, दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि- महिला की मौत ब्लड प्रेशर गिरने की वजह से हुई थी।

पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि गौरव को थाने लाने के दौरान उसकी पत्नी अंजली या अन्य परिजनों के साथ किसी पुलिसकर्मी ने मारपीट नहीं की।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पोस्टमार्टम से जुड़ा है। पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, अंजली के शव के पोस्टमार्टम में कोई External Injury नहीं पाई गई। मामले की जांच एएसपी शिकोहाबाद IPS जयबिंद कुमार गुप्ता को सौंपी गई है।
क्या पुलिस की मारपीट साबित हो गई?
नहीं। परिवार की ओर से पेट में लात मारने और धक्का देने का गंभीर आरोप जरूर लगाया गया है, लेकिन अभी तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में इसका स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। दूसरी तरफ पुलिस मारपीट से इनकार कर रही है और पोस्टमार्टम में बाहरी चोट नहीं मिलने की बात कह रही है।
Factgiri Verdict: MISLEADING | भ्रामक
कांग्रेस के पोस्ट में परिवार के आरोपों को स्थापित तथ्य की तरह पेश किया गया, जबकि पुलिस ने मारपीट से इनकार किया है और पोस्टमार्टम में कोई बाहरी चोट नहीं मिली है। छह पुलिसकर्मियों का निलंबन जरूर हुआ है, लेकिन यह अपने आप पुलिस द्वारा मारपीट या महिला की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार साबित नहीं करता।




