कुंदरकी में ‘वोट चोरी’ का दावा कितना सच? 2022 में BJP के 30% वोट से लेकर 2024 की 1.44 लाख की जीत तक समझिए पूरा मामला

Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर एक बार फिर मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट के 2024 उपचुनाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी। लेकिन क्या चुनाव में धांधली आधिकारिक तौर पर साबित हो चुकी है? Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि कुंदरकी चुनाव को लेकर गंभीर आरोप जरूर लगे थे, लेकिन चुनाव में धांधली साबित होने का कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है।

पहले समझिए 2024 में क्या हुआ था

20 नवंबर 2024 को हुए उपचुनाव में भाजपा के रामवीर सिंह ने सपा के मोहम्मद रिजवान को 1,44,791 वोटों के भारी अंतर से हराया। रामवीर सिंह को 1,70,371 वोट यानी 76.71 प्रतिशत मिले, जबकि रिजवान को 25,580 वोट यानी 11.52 प्रतिशत वोट मिले।

कुंदरकी मुस्लिम बहुल सीट है। चुनाव से पहले हिन्दुस्तान टाइम्स ने यहां मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 62 प्रतिशत बताई थी। 2024 में भाजपा की जीत इसलिए भी बड़ी राजनीतिक घटना मानी गई क्योंकि पार्टी ने इस सीट पर करीब तीन दशक बाद जीत दर्ज की।

2022 का रिकॉर्ड भी तस्वीर का अहम हिस्सा है

यह कहना भी सही नहीं होगा कि भाजपा 2024 से पहले कुंदरकी में बिल्कुल कमजोर थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा करीब 30.4 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर थी, जबकि सपा के जियाउर रहमान बर्क को 46.3 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा और सपा के बीच उस चुनाव में अंतर करीब 43 हजार वोट था। यानी 2024 में भाजपा की जीत असाधारण जरूर थी, लेकिन भाजपा का पहले से मौजूद चुनावी आधार भी था।

सपा के अंदर की खींचतान भी चर्चा में रही

उपचुनाव जियाउर रहमान बर्क के संभल से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद हुआ था। सपा ने पूर्व विधायक मोहम्मद रिजवान को टिकट दिया। ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक बर्क परिवार खुद अपने परिवार से किसी सदस्य को टिकट दिलाना चाहता था और रिजवान को टिकट मिलने से पार्टी के भीतर नाराजगी की बात सामने आई। रिपोर्ट में स्थानीय सपा नेताओं के हवाले से कहा गया कि बर्क परिवार ने रिजवान का पूरी तरह समर्थन नहीं किया।

इसके अलावा मैदान में कई मुस्लिम उम्मीदवार भी थे। इससे मुस्लिम वोटों के बंटने की संभावना को भी चुनावी विश्लेषण में महत्वपूर्ण कारण माना गया।

फिर धांधली के आरोप कहां से आए?

मतदान के दिन सपा और कुछ मतदाताओं ने पुलिस पर मुस्लिम मतदाताओं को मतदान से रोकने और परेशान करने के आरोप लगाए। चुनाव आयोग ने उस दिन चार पुलिसकर्मियों को मतदाता दस्तावेज जांचने के मामले में निलंबित किया था। हालांकि यह कार्रवाई अपने आप में कुंदरकी चुनाव में धांधली साबित नहीं करती।

बाद में Scroll ने बूथ स्तर के आंकड़ों और मतदाता सूचियों का विश्लेषण करते हुए मतदाता दमन और नामों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

सितंबर 2025 में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की ओर से कहा गया कि कुंदरकी की मतदाता सूची में धर्म या जाति दर्ज नहीं होती। आयोग ने यह भी कहा कि कुंदरकी में धर्म के आधार पर किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने या जोड़ने अथवा Form-6 को खारिज करने की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण वह चुनाव के विशिष्ट विवाद पर टिप्पणी नहीं कर रहा है।

हाईकोर्ट में क्या मामला है?

सपा प्रत्याशी मोहम्मद रिजवान ने भाजपा विधायक रामवीर सिंह के निर्वाचन को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट ने रामवीर सिंह समेत सभी प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में सत्ता के दुरुपयोग समेत चुनाव में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

इसलिए फिलहाल यह कहना कि “कुंदरकी चुनाव में धांधली साबित हो गई” तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। वहीं यह कहना भी गलत होगा कि चुनाव को लेकर कोई सवाल या शिकायत हुई ही नहीं थी।

Factgiri का निष्कर्ष

Factgiri की पड़ताल में कुंदरकी उपचुनाव में “बड़े पैमाने पर धांधली साबित होने” का दावा भ्रामक निकला। 2024 में भाजपा के रामवीर सिंह की 1,44,791 वोटों से बड़ी जीत हुई थी। चुनाव के दौरान सपा और कुछ मतदाताओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे और कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी हुई। वहीं सपा प्रत्याशी मोहम्मद रिजवान ने चुनाव परिणाम को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

हालांकि, इन आरोपों के आधार पर अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कुंदरकी उपचुनाव में धांधली साबित हो चुकी है। हाईकोर्ट में मामला अभी लंबित है और इस पर अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है। इसके अलावा 2022 के चुनाव में भी भाजपा करीब 30 प्रतिशत वोट लेकर दूसरे स्थान पर थी और सपा के भीतर टिकट को लेकर जियाउर रहमान बर्क और मोहम्मद रिजवान के खेमों में मतभेद की बात भी चुनावी विश्लेषणों में सामने आई थी।

Verdict: भ्रामक दावा – चुनाव को लेकर आरोप और कानूनी मामला मौजूद है, लेकिन धांधली अभी साबित नहीं हुई है।

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