क्या BJP से चुनाव लड़ने के लिए नंदलाल राय को मिली है कोर्ट से राहत? FactGiri ने की पड़ताल तो सामने आया कुछ और ही सच

FactGiri Fact Check: इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि नंदलाल भाजपा के टिकट पर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता है। FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि भाजपा के टिकट का जिक्र अदालत में नंदलाल के वकील ने किया था। पार्टी की ओर से टिकट देने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है पूरा मामला?
19 अक्टूबर को Bar & Bench और LiveLaw ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के आदेश पर रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें बताया गया कि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने नंदलाल राय की लंबित आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए उसकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई है। नंदलाल ने अदालत से जमानत और दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी।

किस हत्या के मामले में हुई थी उम्रकैद?
17 जनवरी 2017 को वाराणसी में राष्ट्रीय फेरी-पटरी ठेला व्यवसायी संगठन के संस्थापक सचिव प्रमोद निगम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अप्रैल 2025 में वाराणसी की अदालत ने नंदलाल राय और शेषनाथ शर्मा को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अमर उजाला और हिंदुस्तान की रिपोर्टों के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने से रोकने को लेकर हुए विवाद के बाद प्रमोद निगम की हत्या हुई थी।

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कृष्णानंद राय हत्याकांड से क्या संबंध?
नंदलाल राय का नाम पहले भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी सामने आया था। टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान की अप्रैल 2025 की रिपोर्टों के अनुसार, नंदलाल उस मामले में प्रमुख गवाह था, लेकिन बाद में अपनी गवाही से पलट गया। रिपोर्टों में उसके मुख्तार अंसारी से संबंध होने का भी उल्लेख है।

BJP से चुनाव लड़ने की बात किसने कही?
हाईकोर्ट के मूल आदेश के पैरा छह में दर्ज है कि नंदलाल के अधिवक्ता ने उसे पूर्व में भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय या ‘संभव होने पर भाजपा’ के टिकट पर लड़ना चाहता है।

यह नंदलाल की ओर से पेश की गई दलील थी, भाजपा का आधिकारिक बयान नहीं। अब तक उपलब्ध प्रमाणों में भाजपा द्वारा उसे टिकट देने, उम्मीदवार घोषित करने या उसके समर्थन में अदालत जाने की पुष्टि नहीं होती।

हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?
नंदलाल के वकील ने दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए गवाहों के बयानों, घटनाक्रम और हथियार की बरामदगी पर सवाल उठाए। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया।

हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने और प्रस्तुत परिस्थितियों को देखते हुए दोषसिद्धि तथा सजा पर रोक लगाई। अदालत ने व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहाई का आदेश दिया। साथ ही संपत्ति हस्तांतरण पर प्रतिबंध और एक महीने के भीतर जुर्माने की आधी राशि जमा करने जैसी शर्तें भी लगाईं।

बरी नहीं हुए है नंदलाल राय
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का मतलब यह नहीं है कि नंदलाल राय को हत्याकांड में बरी कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने फिलहाल दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई है। इसके साथ ही जमानत दी है. मामले में अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई के बाद होगा।

हाईकोर्ट किसी दोषी को जमानत कैसे दे सकती है?

निचली अदालत से सजा मिलने के बाद भी आरोपी हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। CrPC की धारा 389(1) (अब BNSS में संबंधित प्रावधान) अपीलीय अदालत को लिखित कारणों के साथ सजा के अमल पर रोक लगाने और दोषी को जमानत देने की शक्ति देती है।

क्या दोषसिद्धि पर भी रोक लग सकती है?

हां, लेकिन यह असाधारण स्थिति में होता है। सुप्रीम कोर्ट ने Rama Narang v. Ramesh Narang समेत कई फैसलों में माना है कि उचित परिस्थितियों में दोषसिद्धि पर भी रोक लगाई जा सकती है, खासकर जब इससे नौकरी जाने या चुनाव लड़ने से अयोग्यता जैसे अपरिवर्तनीय नुकसान का खतरा हो।

जनप्रतिनिधियों के मामले में Afjal Ansari v. State of U.P. (2024) 2 SCC 187 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत को अपराध की गंभीरता, आपराधिक इतिहास और सामाजिक प्रभाव के साथ यह भी देखना होगा कि दोषसिद्धि जारी रहने से अन्याय या अपरिवर्तनीय नुकसान तो नहीं होगा। RPA की धारा 8 के तहत दोषसिद्धि से चुनाव लड़ने की अयोग्यता हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में दोषसिद्धि पर रोक लगाने का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

FactGiri का निष्कर्ष
हाईकोर्ट द्वारा नंदलाल राय की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाना सही खबर है। यह भी सही है कि उसके वकील ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की संभावना अदालत में रखी थी। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि भाजपा ने हत्या के दोषी को टिकट दे दिया है या सरकार ने उसे अदालत से राहत दिलाई है, प्रमाणित नहीं होता। हाईकोर्ट का आदेश अपील लंबित रहने तक की राहत है, हत्या के मामले में अंतिम बरी होने का फैसला नहीं।

FACTGIRI VERDICT: भाजपा द्वारा टिकट देने या भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने और राजनीतिक हस्तक्षेप का दावा अप्रमाणित और भ्रामक

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